देशभक्तों को तो लोग अक्सर पागल ही कहते है

- भगत सिंह

भारत नवनिर्माण सेना


मेरा राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ राष्ट्रवाद देश की एक बहुआयामी विचारधारा है | जिससे देश की आन - बान - शान, जैसे – साम्प्रदायिक एकता , सम्प्रभुता , भाषा , धर्म , संस्कृति , रीती - रिवाज़ , वेशभूषा, त्यौहार , समारोह, मेले , सामाजिक सेवा आदि का रक्षण एवं संरक्षण करना है |

  • 1. आप राजनीति से नफरत करने लगें ताकि चंद नेता देश का शासन कर सकें |
  • 2. आप देश से नफरत करने लगें और कहे कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता है|
  • 3. आप धर्म से नफरत करने लगे और धर्म निरपेक्ष हो जाए अर्थात किसी धर्म के नहीं रहे |
  • 4. आप क्रिकेट देखे, इंटरनेट में खो जाये चाहे आपके घर में, मोहल्ले में, समाज में देश में हाहाकार मचा हो |
  • 5. जुर्म होते रहे ताकि आप रस लेकर उनकी ही बात करे |
  • 6. आप पिज़्ज़ा, बर्गर खाये और कोका कोला - पैप्सी पियें ताकि आप मानसिक और शारीरिक रूप से कमज़ोर हो जायें |
  • 7. आप सरकारी नौकरी के लालच में वर्षो बेरोजगार बैठे रहे ताकि आप किसी लायक नहीं रहे |
  • 8. आप नास्तिक बन जाये क्योकि आपका पाप और पुण्य में कोई विश्वास नहीं रहेगा और आप कुछ भी कर गुजरेंगे |
  • 9. आप लालची और भौतिकवादी हो जाये ताकि आप भ्रष्टाचार को बढ़ाने में सहायक हो |


दीनदयाल हिन्दुस्तानी

राष्ट्रीय संयोजक
बी. ए., एम. ए., एल.एल.बी.

वन्देमातरम

आज मै यहाँ सिर्फ आप लोगों के योगदान और समर्थन के लिए हूँ | मै भारत का युवा (चाहे जो उम्र हो) हूँ वो युवा जो जागरूक है जो जानता है उसे किस दिशा में और क्यों बढ़ना है | मै भारत की वो शक्ति हूँ जिससे पूरी दुनिया में क्रांति आ सकती है | मै दिल से युवा हूँ और अपने सभी साथियो को खुद में ही निर्णायक बनते देखना चाहता हूँ |

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अरविन्द राज हिंदुस्तानी

राष्ट्रीय प्रवक्ता
बी .ए. ,बी.एड., एम.ए. ( दर्शनशास्त्र )

वन्देमातरम

भारत देश को आजादी के 72 वर्षो में एक उपलब्धि मिली है। कि आज वर्तमान में हर दुसरा आदमी परेशान हैं क्यों ? सभी राजनैतिक पार्टीयो के द्वारा किये गए कार्यों से आज "देश का युवा इस चिंता में डुबा हुआ है की "99 लिखने के लिए कौन सा 9 पहले लिखुँ ?

हमारे यहां अनेकों तरह के दान किए जाते रहे हैं। जैसे - कन्यादान ,गोदान ,नेत्रदान , रक्तदान , इत्यादि। लेकिन आज सोशल मीडिया पर निःशुल्क व खतरनाक तरीके से जो ज्ञान दिया जा रहा हैं। इसे "ज्ञानदान "कहते हैं। यह निःशुल्क व स्वार्थरूपेण भावना से दिया जाने वाला "ज्ञानदान " दिन -ब -दिन बढ़ता चला जा रहा हैं। इस ज्ञान -दान में जात -पात ,छुआछुत ,हिन्दू -मुस्लिम ,मंदिर -मस्जिद , धर्म की लड़ाई आदि से युवाओ का ध्यान आकर्षित किया जा रहा हैं। मुझे यह जानकर बहुत आश्चर्य होता हैं कि ये "ज्ञानदाता"इस तरह की भावना लाते कहा से हैं ?

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हेमंत कुमार हिंदुस्तानी

राष्ट्रीय प्रभारी
बी बी ए , एम बी ए (रिटेल ऑपरेशन ), पी जी डी बी ए (वित्त) एम कॉम (इ ए फ एम ), एम ए (अर्थशास्त्र )

मेरे प्रिय भारतीय भाइयो और बहनों,
वन्देमातरम

मैं मेरी बात कवि के द्वारा कही इन पंक्तियों से शुरू करूँगा:

बाद मुद्दत के मिले हैं दिवाने, कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने.
खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने.

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